शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवैः... देवाय तस्मै नमः ॥
यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवैः वेदैः साङ्गपदक्रमोपनिषदैः गायन्ति यं सामगाः । ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो यस्यान्तं न विदुः सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारगीता ध्यान मन्त्र / स्तुति मन्त्र
स्वरूपपरब्रह्म / योगेश्वर कृष्ण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी ब्रह्मा, वरुण, इन्द्र, रुद्र आदि दिव्य स्तुतियों से प्रशंसा करते हैं, जिन्हें योगी ध्यानावस्थित होकर देखते हैं, और जिनका अन्त देवता या असुर कोई नहीं जानता, उन परम देव को मेरा नमस्कार है 21।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मन की शुद्धि, ध्यान में अगाध एकाग्रता और परब्रह्म का मानसिक साक्षात्कार
विस्तृत लाभ
मन की शुद्धि, ध्यान में अगाध एकाग्रता और परब्रह्म का मानसिक साक्षात्कार 21।
जप काल
भगवद्गीता के पाठ से ठीक पूर्व मानसिक एकाग्रता हेतु 21।
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