शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ भिन्नलोहाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपबन्धन-भंजक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पिता वसुदेव की लोहे की बेड़ियाँ तोड़ने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कर्म-बन्धनों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
कर्म-बन्धनों से मुक्ति
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुप्रसन्नायै नमः
वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥
ॐ धीरोदात्ताय नमः
ॐ गद्यपद्यवासिन्यै स्वाहा मामुत्तरेऽवतु। (अर्थ: गद्य-पद्य में निवास करने वाली देवी उत्तर में रक्षा करें) 8
ॐ भगवते नमः
ॐ अशेषगुणसम्पन्नायै नमः