शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ चक्रधराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपचक्रधर
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अधर्म का नाश करने वाले चक्रधारी को नमन।
जप काल
युद्ध या भीषण संघर्ष के समय
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम्। सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः
ॐ वृन्दारध्यायै नमः
ॐ कर्पूरचन्दनोक्षितायै नमः
योगारूढो योगपट्टाभिरामः बालार्कभाश्च नीलांगशुकः । पाशेक्ष्वाक्षान् योगदण्डं दधानः पायान्नित्यं योगविघ्नेश्वरः नः ॥
ॐ ग्रन्थबीजरूपायै स्वाहा मां सर्वतोऽवतु। (अर्थ: ग्रंथों का बीज रूप देवी मेरी सभी दिशाओं से रक्षा करें) 8