शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ चिरञ्जीविने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपअजर-अमर
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कल्प के अंत तक पृथ्वी पर सदेह जीवित रहने वाले चिरंजीवी हैं।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वित्तायै नमः
ॐ वामदेवाय नमः
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
बालार्कारुणकान्तिर्वामे बालां वहन् अङ्के । लसदिन्दीवर हस्तं गौराङ्गीं रत्नशोभाढ्याम् ॥ दक्षे अङ्कुश वरदानं वामे पाशं च पायसं पात्रम् । नीलांशुक समान पीठपद्मारुणे तिष्ठन् संकटहरणः पायात् ॥
ॐ स्वयम्भुवे नमः
ॐ वर्णाश्रयप्रदाय नमः