शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
घ्राणं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं पातु सरस्वती। भुजौ तु पातु वरदा हृदय पातु सुन्दरी॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारलक्ष्मी कवच (हृदय-रक्षा मंत्र)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नासिका की महालक्ष्मी, कंठ की सरस्वती, भुजाओं की वरदा और हृदय की रक्षा सुंदरी देवी करें 45।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाणी, श्वसन और हृदय की आध्यात्मिक व भौतिक रक्षा
विस्तृत लाभ
वाणी, श्वसन और हृदय की आध्यात्मिक व भौतिक रक्षा।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भावगम्याय नमः
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
ॐ महाशान्तायै नमः
देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम्। रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ श्रीधराय नमः
ॐ अच्युतायै नमः