तांत्रिक श्रीविद्या सम्पुटित लक्ष्मी मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
यह पंचदशी विद्या से सम्पुटित श्रीविद्या का सर्वोच्च कूट-मंत्र है, जो देवी के त्रिविध शरीरों का नाद रूप है।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि और दरिद्रता का समूल नाश
विस्तृत लाभ
व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि और दरिद्रता का समूल नाश।
जप काल
केवल गुरु-दीक्षा प्राप्त साधकों द्वारा दीपावली की रात्रि में 21 माला 25।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कामदेवाय सर्वजनप्रियाय सर्वजनसम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल सर्वजनस्य हृदयं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ॥
ॐ जगन्नाथाय नमः
ॐ सत्यपराक्रमाय नमः
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ श्रीं सौं शरवणभवाय नमः
ॐ ह्रीं बटुकाय मम संतान बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।