हनुमान मंत्र
कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो ईषत् हास्य वाली, स्वर्ण-आवरण युक्त, दयार्द्र, तेजोमयी, स्वयं तृप्त और कमलवर्णा हैं, उनका मैं आवाहन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
मानसिक शांति, संतुष्टि
विस्तृत लाभ
मानसिक शांति, संतुष्टि।
जप काल
नित्य पूजा में ध्यान के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
अगजानन पद्मार्कं गजाननमहर्निशम् । अनेकदन्तं भक्तानाम् एकदन्तमुपास्महे ॥
ॐ सौम्याय नमः
ॐ करालाय नमः
ॐ यदूद्वहाय नमः