राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे । राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे ॥
राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे । राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
श्री राधा और श्री कृष्ण (श्याम) के दिव्य युगल नामों का निरन्तर आवाहन और महिमा-गान।
इस मंत्र से क्या होगा?
युगल-भक्ति (सखी भाव) की प्राप्ति, मानसिक शान्ति, और वृन्दावन-रस का गहरा अनुभव
विस्तृत लाभ
युगल-भक्ति (सखी भाव) की प्राप्ति, मानसिक शान्ति, और वृन्दावन-रस का गहरा अनुभव 18।
जप काल
संकीर्तन के रूप में उच्च स्वर में या तुलसी माला पर नित्य जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अगजानन पद्मार्कं गजाननमहर्निशम् । अनेकदन्तं भक्तानाम् एकदन्तमुपास्महे ॥
ॐ अचिन्त्याद्भुतरूपिण्यै नमः
ॐ वरप्रदाय नमः
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥ 36
ॐ अरिमर्दनाय नमः
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।