शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
रूरु भैरव मंत्र (दक्षिण-पूर्व दिशा)
रुं ह्रीं रुरवे नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअष्टभैरव मंत्र
स्वरूपरूरु भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रूरु भैरव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ज्ञान की प्राप्ति और जीवन में समृद्धि
विस्तृत लाभ
ज्ञान की प्राप्ति और जीवन में समृद्धि 25।
जप काल
वृषभ (बैल) वाहन का ध्यान करते हुए आग्नेय कोण में 26।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं गुरुरूपे मां गृह्ण ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
ॐ संसारभयतः पातु मृत्योर्मृत्युर्-नृकेसरी
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्। गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥
ॐ विश्वहराय नमः
ॐ कृष्णचित्तहरायै देव्यै नमः
ॐ नमः प्रणवार्थाय प्रणवार्थविधायिने । प्रणवाक्षरबीजाय प्रणवाय नमो नमः ॥