शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
रूरु भैरव मंत्र (दक्षिण-पूर्व दिशा)
रुं ह्रीं रुरवे नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअष्टभैरव मंत्र
स्वरूपरूरु भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रूरु भैरव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ज्ञान की प्राप्ति और जीवन में समृद्धि
विस्तृत लाभ
ज्ञान की प्राप्ति और जीवन में समृद्धि 25।
जप काल
वृषभ (बैल) वाहन का ध्यान करते हुए आग्नेय कोण में 26।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्। अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥
ॐ विनायकायै नमः
ॐ पवित्राय नमः
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
ॐ कामबीजशिरोमणये नमः
ॐ परशुहस्ताय नमः