त्र्यंबक भैरव मंत्र
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं, जो मृत्यु के बंधनों से मुक्त कर अमरता प्रदान करते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
अकाल मृत्यु से रक्षा, स्वास्थ्य लाभ
विस्तृत लाभ
अकाल मृत्यु से रक्षा, स्वास्थ्य लाभ 7।
जप काल
प्रातःकाल या प्रदोष में रुद्राक्ष माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विरजायै नमः
ॐ द्वैमातुराय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये संहारकर्ता तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ महाकायाय नमः
ॐ दुर्गम्यायै नमः