शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ भक्तार्तिभञ्जनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपआर्तिहर
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भक्तों की पीड़ा और कष्टों को भंग करने वाले को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
गंभीर रोगों और मानसिक अवसादों का निवारण
विस्तृत लाभ
गंभीर रोगों और मानसिक अवसादों का निवारण।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
परशुं दक्षिणे हस्ते वामे च दधतं धनुः। रम्यं भृगुकुलोत्तंसं घनश्यामं मनोहरम्॥
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला कुँअरि लईं हँकारि कै॥
ॐ निर्विकाराय नमः।
ॐ भूतपतये नमः
ॐ कालनेमिप्रमथनाय नमः