शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ धेनुकासुरभञ्जनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपधेनुकासुर-संहारक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
धेनुकासुर का वध करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान नाश हेतु
विस्तृत लाभ
अज्ञान नाश हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ राम रामाय नमः
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥
ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं ॥
वेदान्तार्थस्वरूपाय वेदान्तार्थविधायिने । वेदान्तार्थविदे नित्यं विदिताय नमो नमः ॥
ॐ किशोरानन्ददायिन्यै नमः
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्। सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥