शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ जृम्भाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपविस्तार स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
विस्तार लेने वाले (विराट) देव को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कार्यक्षेत्र और व्यापार में विस्तार
विस्तृत लाभ
कार्यक्षेत्र और व्यापार में विस्तार।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ परमपुरुषाय नमः
ॐ अनूपमायै नमः
ॐ कामबीजजपानन्दायै नमः
ॐ अव्ययाय नमः
ॐ अच्युताय नमः