शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ वरदहस्ताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवरद-हस्त
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सदैव वरदान देने के लिए हाथ उठाए रखने वाले देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ईश्वरीय कृपा और वरदान की अनवरत वर्षा
विस्तृत लाभ
ईश्वरीय कृपा और वरदान की अनवरत वर्षा।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ वेदान्तज्ञानरूपिण्यै नमः
ॐ वैष्णव्यै नमः
ॐ कामरूपकृतावासायै नमः
ॐ परब्रह्मणे नमः
ॐ हुं हुं शत्रुस्तम्भनाय हुं हुं ॐ फट्