शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ वसुदेवात्मजाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपवसुदेव पुत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वसुदेव के आत्मज (पुत्र) को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पारिवारिक प्रेम हेतु
विस्तृत लाभ
पारिवारिक प्रेम हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ करवालप्रियागत्यै नमः
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
य इदं कवचं श्रीदं पठेद्विष्णुप्रियात्मकम्। त्रैलोक्यं विजितं तेन येन वा धारितं भवेत्॥
ॐ महासिंहाय नमः
ॐ विभवे नमः
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥ 16