ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कामराज विद्या गायत्री

ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारतांत्रिक गायत्री
स्वरूपकामराज विद्या-स्वरूपा
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हम वाग्देवी को जानते हैं, कामराज विद्या का ध्यान करते हैं, वह देवी हमारी प्रज्ञा को प्रेरित करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

कला, संगीत और साहित्य में विशिष्ट पहचान और प्रसिद्धि

विस्तृत लाभ

कला, संगीत और साहित्य में विशिष्ट पहचान और प्रसिद्धि।

जप काल

प्रातः काल 108 जप।

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