शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
इतीदमद्भुतस्तवं निशम्य भानुनन्दिनी करोतु सन्ततं जनं कृपाकटाक्षभाजनम्। भवेत्तदैव सञ्चितत्रिरूपकर्मनाशनं लभेत्तदा व्रजेन्द्रसूनुमण्डलप्रवेशनम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपभानुनन्दिनी (वृषभानु पुत्री)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
(फलश्रुति) हे भानुनन्दिनी! इस अद्भुत स्तुति को सुनकर आप अपने दास को सदा के लिए कृपा-कटाक्ष का पात्र बना लें, जिससे मेरे प्रारब्ध कर्म नष्ट हों और मैं कृष्ण के नित्य मण्डल में प्रवेश पाऊँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
लाभ: संचित कर्मों का नाश और ब्रजमंडल में प्रवेश
विस्तृत लाभ
लाभ: संचित कर्मों का नाश और ब्रजमंडल में प्रवेश।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
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