शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ कृष्णप्राणाधिदेव्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आयु और स्वास्थ्य की रक्षा
विस्तृत लाभ
आयु और स्वास्थ्य की रक्षा।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 17
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महामीनाय धीमहि तन्नो मत्स्यः प्रचोदयात्।
शुद्धं बुद्धं महाप्रज्ञापण्डितं रणपण्डितं। रामं श्रीदत्तकरुणाभाजनं विप्ररंजनम्॥
ॐ मूर्त्यै नमः
ॐ कपालरूपमात्रगायै नमः