माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ रत्नसिंहासनासीनाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान देव को नमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में उच्च पद, ऐश्वर्य और स्थिरता
विस्तृत लाभ
जीवन में उच्च पद, ऐश्वर्य और स्थिरता।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
क्लह्रीं (Klhrīm)
चोदयित्री सूनृतानां चेतन्ती सुमतीनाम्। यज्ञं दधे सरस्वती॥
ॐ अनेकनेत्राय नमः।
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा।
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ महोदराय विद्महे महाजठराय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥