शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद स्तुति
वेदान्तार्थस्वरूपाय वेदान्तार्थविधायिने । वेदान्तार्थविदे नित्यं विदिताय नमो नमः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारश्लोक 2
स्वरूपवेदांत-स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वेदांत के अर्थ स्वरूप, वेदांत का विधान करने वाले और वेदांत के ज्ञाता भगवान को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वेदों और वेदांत के गूढ़ अर्थों की समझ
विस्तृत लाभ
वेदों और वेदांत के गूढ़ अर्थों की समझ।
जप काल
स्वाध्याय के समय।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्वराजे नमः
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18
ॐ नारसिंहाय नमः
जो भक्तों के हृदय में रमण करने वाले भगवान राम (भार्गव राम) हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: आंतरिक शांति) 19।
ॐ कमलासनवासिन्यै नमः
ॐ श्रीं क्लीं श्रीं नमः।