शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ ब्रह्माण्डकोटयः कट्यां यस्यासौ पातु मे कटिम्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकटि (कमर) / विराट रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके कटि में कोटि-कोटि ब्रह्मांड स्थित हैं, वे मेरी कटि की रक्षा करें। (शारीरिक सुदृढ़ता)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ भूतभृते नमः
ॐ अभयायै नमः
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः
ॐ सर्वविद्यासम्पत्प्रदायकाय नमः
ॐ मृतवानरजीवनाय नमः