शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ नाभिं मे पातु नरहरिः स्वनाभिब्रह्मसंस्तुतः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनाभि / स्रष्टा स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी नाभि से उत्पन्न ब्रह्मा उनकी स्तुति करते हैं, वे नरहरि मेरी नाभि की रक्षा करें।
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