शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
उत्तर मुख (वराह) रक्षण मंत्र
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय उत्तर मुखे। आदि वराहाय सकल संपत्कराय स्वाहा॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारपंचमुखी साधना मंत्र (उत्तर मुख)
स्वरूपपंचमुखी हनुमान (वराह मुख)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
उत्तर दिशा की ओर आदि वराह मुख वाले भगवान को नमस्कार है, जो साधक को सभी प्रकार की संपत्तियां और ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
नवग्रहों के कुप्रभावों से मुक्ति, अष्ट-ऐश्वर्य, अपार धन-संपत्ति और यश की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
नवग्रहों के कुप्रभावों से मुक्ति, अष्ट-ऐश्वर्य, अपार धन-संपत्ति और यश की प्राप्ति 13।
जप काल
उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) की ओर मुख करके।
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