शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपरम पुरुष
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी पुरुषों (जीवों) में उत्तम हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
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साधक के चरित्र में सत्य, न्याय और मर्यादा जैसे उत्तम गुणों का विकास
विस्तृत लाभ
साधक के चरित्र में सत्य, न्याय और मर्यादा जैसे उत्तम गुणों का विकास।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
योगारूढो योगपट्टाभिरामः बालार्कभाश्च नीलांगशुकः । पाशेक्ष्वाक्षान् योगदण्डं दधानः पायान्नित्यं योगविघ्नेश्वरः नः ॥
ॐ त्रिशक्त्यै नमः
तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ पद्मायै नमः
ॐ रघुपुङ्गवाय नमः
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8