शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपरम पुरुष
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी पुरुषों (जीवों) में उत्तम हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
साधक के चरित्र में सत्य, न्याय और मर्यादा जैसे उत्तम गुणों का विकास
विस्तृत लाभ
साधक के चरित्र में सत्य, न्याय और मर्यादा जैसे उत्तम गुणों का विकास।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
ॐ विघ्नराजाय नमः
तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्रविनिवारकाय नमः
ॐ पूतनाजीवितापहाराय नमः
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।