शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ रुद्रावीर्यसमुद्भवाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपरुद्र-अंश
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भगवान शिव (रुद्र) के वीर्य/अंश से पवनदेव के माध्यम से उत्पन्न भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय मम पूर्ण तंत्र सिद्धिं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय।
बिभ्राणः शुक बीजपूर कमलं माणिक्यकुम्भं अङ्कुशं पाशं कल्पलतां च खड्ग विलसत् ज्योतिः सुधानिर्झरः । श्यामेनात्त सरोरुहेण सहितो देवीद्वयेनान्तिके गौराङ्गो वरदान हस्त कमलो लक्ष्मीगणेशोऽवतात् ॥
ॐ विश्वशक्त्यै नमः
ॐ अकल्मषाय नमः
ॐ जयायै नमः।
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।