शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ सँ कम् रम् सँ रम् हुं फट् सहस्रार हुं फट्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपबीजाक्षर अस्त्र मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
'सम्', 'कम्', 'रम्' आदि सुदर्शन के तांत्रिक बीज हैं। यह मंत्र नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर साधक के इर्द-गिर्द अग्नि-प्राचीर बनाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ज्वालिन्यै नमः
वायव्ये कपाल भैरवाय नमः वायव्ये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ करञ्जमालाभरणायै नमः
ॐ ऐं श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा दक्षिणे मां सदाऽवतु। (अर्थ: ज्ञानियों की माता दक्षिण दिशा में रक्षा करें) 8
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव
ॐ ह्रस्वग्रीवाय नमः