शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ त्रिलोकात्मने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविराट रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल—तीनों लोकों की आत्मा हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर सार्वभौमिक चेतना (Cosmic Consciousness) से जुड़ना
विस्तृत लाभ
संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर सार्वभौमिक चेतना (Cosmic Consciousness) से जुड़ना।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
गाङ्गेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रौञ्चारिश्च षडाननः ॥
ॐ जानुदेशं जया पातु।
ॐ उदधिक्रमणाय नमः
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नीलांजना समाभास्वरूपिणी। या स्वाहा
वसुन्धरे श्री वसुधे वसुदोग्ध्रे कृपामयि! त्वत्कुक्षिगतं सर्वस्वं शीघ्रं मे त्वं प्रदर्शय॥