शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
मंत्रराज पद स्तोत्र मंत्र
वृत्तोत्फुल्लविशालाक्षं विपक्षक्षयदीक्षितम्। निनादत्रस्तविश्वाण्डं विष्णुमुग्रं नमाम्यहम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र श्लोक
स्वरूपउग्र नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी विशाल आँखें पूरी तरह खुली हुई हैं, जो शत्रुओं के नाश हेतु संकल्पित हैं, और जिनकी गर्जना से संपूर्ण ब्रह्मांड भयभीत है, उन उग्र विष्णु को मैं नमस्कार करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आयु, विद्या और ऐश्वर्य की वृद्धि
02
भयंकर शत्रुओं का दमन
विस्तृत लाभ
आयु, विद्या और ऐश्वर्य की वृद्धि। भयंकर शत्रुओं का दमन।
जप काल
त्रिसंध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में भगवान शिव द्वारा रचित इस स्तोत्र का पाठ।
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