श्री नरसिंह गायत्री मंत्र
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नारसिंहः प्रचोदयात्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
हम उन भगवान का स्मरण करते हैं जिनके नख वज्र के समान हैं, हम उन तीक्ष्ण दांतों वाले देव का ध्यान करते हैं। वे नरसिंह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
आध्यात्मिक जागरण, बुद्धि की प्रखरता, इन्द्रिय निग्रह और सांसारिक दुविधाओं से पूर्ण मुक्ति
विस्तृत लाभ
आध्यात्मिक जागरण, बुद्धि की प्रखरता, इन्द्रिय निग्रह और सांसारिक दुविधाओं से पूर्ण मुक्ति।
जप काल
ब्रह्म मुहूर्त में स्फटिक या तुलसी माला से 108 बार जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः ॐ देवलक्ष्म्यै नमः ॐ सर्वोपद्रवनिवारिण्यै नमः।
ॐ वज्रनखाय नमः
ॐ शब्दब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः
ॐ कमलासनसंस्तुताय नमः
ॐ कलाधारायै नमः