ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

मुख कमल वासिनी मन्त्र

ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारतांत्रिक वाक्-सिद्धि एवं पाप-नाशक मन्त्र
स्वरूपमुख कमल वासिनी (मुख रूपी कमल पर निवास करने वाली)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

मुख रूपी कमल पर निवास करने वाली, पापों का नाश करने वाली, हे वाग्वादिनी सरस्वती! आप मेरे मुख से बोलें (सत्य और ज्ञान बुलवाएं), आपको नमस्कार और आहुति है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

वाणी में वशीकरण शक्ति का उदय, पूर्वकृत पाप कर्मों का क्षय, धन और परम ज्ञान की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

वाणी में वशीकरण शक्ति का उदय, पूर्वकृत पाप कर्मों का क्षय, धन और परम ज्ञान की प्राप्ति।

जप काल

1 लाख बार जपने से वाक् सिद्धि होती है। जैन आगम परंपरा में भी यह मन्त्र मान्य है।

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