परशुराम मंत्र
ॐ द्विरूपभृते नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो एक साथ नर (मनुष्य) और सिंह का दोहरा रूप धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
द्वैत (संसार) और अद्वैत (ब्रह्म) के रहस्यमय दर्शन और ज्ञान की समझ
विस्तृत लाभ
द्वैत (संसार) और अद्वैत (ब्रह्म) के रहस्यमय दर्शन और ज्ञान की समझ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दुष्टं क्षत्रं भुवो भारमब्रह्मण्यमनीनशत्। तस्य नामानि पुण्यानि वच्मि ते पुरुषर्षभ॥
ॐ कवये नमः।
ॐ त्रिवर्णायै नमः
ॐ गोपीगृहाङ्गणरतये नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ सहस्रपदे नमः