ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

परशुराम मंत्र

ॐ प्रियाय नमः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसबके प्रिय
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो भक्त जनों और देवताओं को अत्यंत प्रिय हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

प्रेम व सम्मान

विस्तृत लाभ

प्रेम व सम्मान

जप काल

नित्य

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

ॐ ग्रन्थबीजरूपायै स्वाहा मां सर्वतोऽवतु। (अर्थ: ग्रंथों का बीज रूप देवी मेरी सभी दिशाओं से रक्षा करें) 8

ॐ रामभद्राय नमः

ॐ गणनाथाय नमः

ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं लाट भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।

ॐ युधिष्ठिरप्रतिष्ठात्रे नमः

ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।