शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ विधये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपविधाता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं विधाता (ब्रह्मा) रूप होकर सृष्टि के विधान रचते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भाग्य वृद्धि
विस्तृत लाभ
भाग्य वृद्धि
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वसुप्रदायै नमः
ॐ अमेयात्मने नमः
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः
ॐ कमलालयामध्यस्थायै नमः