श्री राधा मंत्र
ॐ अधरं गोपिका पातु।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
गोपिका मेरे अधर की रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
अंग: निचले होंठ (अधर) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: निचले होंठ (अधर) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यशस्विन्यै नमः
न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौ... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।
ॐ करालास्यायै नमः
श्रीमत्तीक्ष्ण शिखाङ्कुशाक्षवरदान् दक्षे दधानः करैः पञ्चामृतपूर्णकुम्भमभयं वामे दधानो मुदा । पीठ स्वर्णमयारविन्दविलसत् सत्कर्णिका भासुरे आसीनस्त्रिमुखः पलाशरुचिरो नागाननः पातु नः ॥
ॐ सर्ववर्णात्मिकायै पादयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: सर्ववर्णात्मिका | लाभ: दोनों पैरों की रक्षा | अर्थ: समस्त अक्षर-स्वरूपा देवी मेरे पैरों की रक्षा करें) 8