श्री हनुमत् मूल मंत्र
ॐ श्री हनुमते नमः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैं भगवान श्री हनुमान जी को सादर साष्टांग प्रणाम करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह आधारभूत मंत्र है जो शारीरिक बल, अपार सहनशक्ति, संकटों से मुक्ति और जीवन में सर्वांगीण कार्य-सिद्धि प्रदान करता है
विस्तृत लाभ
यह आधारभूत मंत्र है जो शारीरिक बल, अपार सहनशक्ति, संकटों से मुक्ति और जीवन में सर्वांगीण कार्य-सिद्धि प्रदान करता है 24।
जप काल
प्रातःकाल स्नानोपरांत, लाल आसन पर पूर्वाभिमुख होकर, लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से नित्य 108 बार जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तडित्सुवर्णचम्पकप्रदीप्तगौरविग्रहे मुखप्रभापरास्तकोटिशारदेन्दुमण्डले। विचित्रचित्रसञ्चरच्चकोरशावलोचने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ विशारदाय नमः
ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः
कर्णयुग्मं च कण्ठं च कपालं पातु माधवः । कपोलं पातु गोविन्दः केशांश्च केशवः स्वयम् ॥
ॐ सर्वावगुणवर्जिताय नमः
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥