शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विजया नित्या मंत्र
भ्म्यरौं (Bhmyaraum)
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारएकाक्षर नित्या मंत्र
स्वरूपविजया (13वीं नित्या)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सर्व-विजयी शक्ति को प्रणाम।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शास्त्रार्थ, बौद्धिक चर्चा और युद्ध में निश्चित विजय
विस्तृत लाभ
शास्त्रार्थ, बौद्धिक चर्चा और युद्ध में निश्चित विजय।
जप काल
अष्टदल कमल में आवाहन एवं न्यास।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥ 17
ॐ गुहान्तस्थायै नमः
ॐ कलाधारायै नमः
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मि मम गृहे धनं पूरय पूरय स्वाहा।
वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः कालाय नमः कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमो बलाय नमो बलप्रमथनाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः॥
यस्य त्वेतानि चत्वारि वानरेन्द्र यथा तव। धृतिर्दृष्टिर्मतिर्दाक्ष्यं स कर्मसु न सीदति॥