शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ सत्यभामायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ईश्वरीय सत्य और दिव्य आभा से पूर्णतः दीप्त हैं।
जप काल
तुलसी माला पर जप।
टिप्पणी
साधना की दृष्टि से इन नामों को ॐ और 'नमः' या 'स्वाहा' के सम्पुट के साथ जपा जाता है।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
ॐ वागधीशाय नमः
ॐ नखास्त्राय नमः
न च प्राणसंज्ञो न वै पंचवायुः... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥
ॐ गोवर्धनवरप्रदाय नमः