शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ ब्रह्माण्डकोटयः कट्यां यस्यासौ पातु मे कटिम्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकटि (कमर) / विराट रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके कटि में कोटि-कोटि ब्रह्मांड स्थित हैं, वे मेरी कटि की रक्षा करें। (शारीरिक सुदृढ़ता)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
ॐ द्वारकानायकाय नमः
ॐ क्रियायै नमः
ॐ महाकायाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विज्ञानात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय दक्षिण मुखे। कराल वदनाय नरसिंहाय सकल भूत प्रेत प्रमथनाय स्वाहा॥