सरस्वती प्रार्थना घनपाठ
देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
यह सरस्वती सूक्त के शब्दों का ज्यामितीय (mathematical) पुनरावृत्ति पाठ है, जो वाणी की देवी से प्रज्ञा और शक्ति का सघन आह्वान करता है।
इस मंत्र से क्या होगा?
स्मरण शक्ति (Memory) और मस्तिष्क की एकाग्रता में अत्यधिक वृद्धि
घनपाठ के विशेष श्रवण और पठन से मस्तिष्क की न्यूरल तरंगें संतुलित होती हैं
विस्तृत लाभ
स्मरण शक्ति (Memory) और मस्तिष्क की एकाग्रता में अत्यधिक वृद्धि। घनपाठ के विशेष श्रवण और पठन से मस्तिष्क की न्यूरल तरंगें संतुलित होती हैं।
जप काल
गुरुकुल परंपरा में विशेष नाद-साधना के समय उच्च स्वर में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सागरोत्तारकाय नमः
ॐ चोरघ्नाय नमः
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
घ्राणं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं पातु सरस्वती। भुजौ तु पातु वरदा हृदय पातु सुन्दरी॥
ॐ अध्यक्षरायै नमः
ॐ धर्माध्यक्षाय नमः