शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
ओष्ठ रक्षा मन्त्र
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ परमडम्भाय नमः
जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी को जीतकर अश्वमेध यज्ञ में महर्षि कश्यप को दान कर दिया, उन पृथ्वी-पति को नमस्कार। (लाभ: संपत्ति एवं राज्याधिकार की प्राप्ति) 19।
लक्ष्मीर्हरिप्रिया पद्मा एतन्नामत्रयं स्मरन्। सर्वान्कामानवाप्नोति सत्यं सत्यं हि पद्मज॥
ॐ नागाय नमः
ॐ कृष्णवल्लभायै नमः
क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा