मयि मेधां मयि प्रज्ञां
मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
अग्नि देव मुझमें मेधा, प्रजा और तेज धारण करें। इंद्र देव मुझमें मेधा, प्रजा और इन्द्रिय-बल स्थापित करें। सूर्य देव मुझमें मेधा, प्रजा और प्रकाश स्थापित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
मेधा (बुद्धि), प्रज्ञा (विशिष्ट ज्ञान), तेज और शारीरिक शक्ति का समग्र विकास
विस्तृत लाभ
मेधा (बुद्धि), प्रज्ञा (विशिष्ट ज्ञान), तेज और शारीरिक शक्ति का समग्र विकास।
जप काल
प्रातःकालीन सन्ध्या-वंदन या अध्ययन के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अनादये नमः
ॐ निरामयाय नमः
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः ॥ त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ॥ त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि ॥ त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ॥ त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥
दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥
ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात्॥
ॐ प्रमत्ताय नमः