शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
प्रत्यंगिरा सिद्ध-लक्ष्मी श्लोक
राजमातां राजलक्ष्मीं राजेष्टफलदायिनीम्। प्रत्यङ्गिरां नमस्यामि सिद्धिलक्ष्मीजयप्रदां॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
राजमाता, राजलक्ष्मी और विजय प्रदात्री प्रत्यंगिरा सिद्ध-लक्ष्मी को मैं नमन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
उच्चाधिकारियों/नेताओं के लिए सत्ता-संरक्षण
विस्तृत लाभ
उच्चाधिकारियों/नेताओं के लिए सत्ता-संरक्षण।
जप काल
शत्रुओं के दमन हेतु 33।
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ह स ख म ल व र यूं आनंद भैरवाय स्वाहा।
बिभ्राणः शुक बीजपूर कमलं माणिक्यकुम्भं अङ्कुशं पाशं कल्पलतां च खड्ग विलसत् ज्योतिः सुधानिर्झरः । श्यामेनात्त सरोरुहेण सहितो देवीद्वयेनान्तिके गौराङ्गो वरदान हस्त कमलो लक्ष्मीगणेशोऽवतात् ॥
बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम सत्य अस होई॥
ॐ सर्वमन्त्रस्वरूपवते नमः
ॐ विराट्सुताय नमः
ॐ नमो वज्रनखाय च