शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ यज्ञेशाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपयज्ञों के स्वामी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिन्हें सभी यज्ञों का अंतिम फल और हवि प्राप्त होती है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पूर्णता
विस्तृत लाभ
पूर्णता
जप काल
यज्ञ के अंत में
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥ 18
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सर्ववेदशाखासांख्यपुराणात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
ॐ सर्वतन्त्रस्वरूपिणे नमः
ॐ कण्ठं मे पातु नृहरिर्भूभृदनन्तकोटनः