शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भूत-भविष्य दर्शन मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय मम भूत भविष्यं दर्शय दर्शय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक कार्य-सिद्धि मंत्र
स्वरूपबटुक भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे बटुक, मुझे भूत और भविष्य का दर्शन कराएं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
त्रिकाल दर्शन की क्षमता हेतु
विस्तृत लाभ
त्रिकाल दर्शन की क्षमता हेतु।
जप काल
एकांत में 11 माला जप 11।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दुर्मदाय नमः
कर्णयुग्मं च कण्ठं च कपालं पातु माधवः । कपोलं पातु गोविन्दः केशांश्च केशवः स्वयम् ॥
ॐ सत्यसन्धाय नमः
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥ 18
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सर्ववेदशाखासांख्यपुराणात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः