शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र
शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारश्लोक 4
स्वरूपशरजन्मा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शरवन में जन्मे, गणेश के पूर्वज, मुक्ति-मार्ग प्रशस्त करने वाले, सभी आगमों के प्रणेता।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शास्त्रों का ज्ञान व इच्छाओं की पूर्ति
विस्तृत लाभ
शास्त्रों का ज्ञान व इच्छाओं की पूर्ति।
जप काल
नित्य संध्याकाल।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र