शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद स्तुति
वेदान्तार्थस्वरूपाय वेदान्तार्थविधायिने । वेदान्तार्थविदे नित्यं विदिताय नमो नमः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारश्लोक 2
स्वरूपवेदांत-स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वेदांत के अर्थ स्वरूप, वेदांत का विधान करने वाले और वेदांत के ज्ञाता भगवान को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वेदों और वेदांत के गूढ़ अर्थों की समझ
विस्तृत लाभ
वेदों और वेदांत के गूढ़ अर्थों की समझ।
जप काल
स्वाध्याय के समय।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महाबलपराक्रमाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवीपार्वती तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
आ नो दिवो बृहतः पर्वतादा सरस्वती यजता गन्तु यज्ञम्। हवं देवी जुजुषाणा घृताची शग्मां नो वाचमुशती शृणोतु॥
शुद्धं बुद्धं महाप्रज्ञापण्डितं रणपण्डितं। रामं श्रीदत्तकरुणाभाजनं विप्ररंजनम्॥
ॐ तपोरूपाय विद्महे ब्रह्मचारिणे धीमहि तन्नो वामनः प्रचोदयात्।
ॐ अनेककण्ठाय नमः।