शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ राक्षसामरगन्धर्वकोटिकोट्यभिवन्दिताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपत्रिलोक-पूज्य
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
राक्षसों, देवों और गंधर्वों द्वारा वंदित देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विविध पृष्ठभूमियों के लोगों का सहयोग
विस्तृत लाभ
विविध पृष्ठभूमियों के लोगों का सहयोग।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दुर्गमविद्यायै नमः
ॐ सर्वेश्वराय नमः
ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः
सुवर्णवेष्टितं चाङ्गे लक्ष्मीमन्त्रं शतक्रतो। तस्यायुषो भवेद् वृद्धिः सर्वत्र विजयी महान्॥
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ बालपराक्रमाय नमः।