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बगलामुखी सर्वदुष्ट स्तम्भन मूल मंत्र, विनियोग, न्यास और जप विधिरुद्रयामल तंत्रहिन्दी

माँ बगलामुखी सर्वदुष्ट स्तम्भन मूल मंत्र विनियोग न्यास और जप विधि -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताश्री बगलामुखी

बगलामुखी साधनादशमहाविद्या साधनास्तम्भन मंत्रतांत्रिक मंत्ररुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में '८. माता बगलामुखी की आराधना' के अंतर्गत दक्षिणाम्नाय और ऊर्ध्वाम्नाय बगलामुखी मन्त्र परिचय के बाद '(ख) दो मन्त्रों के विधान' में पहले मन्त्र का विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कराङ्ग-न्यास, ध्यान-सूचक और मूलमन्त्र दिया गया है।

मूल मंत्र

दक्षिणाम्नाय मन्त्र

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ।

ऊर्ध्वाम्नाय ब्रह्मास्त्रस्वरूपिणी बगला मन्त्र

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय, जिह्वां कीलय, बुद्धिं विनाशय, ह्लीं ॐ स्वाहा ।

विनियोग

अस्य श्री बगलामुखी-मन्त्रस्य नारद ऋषिः त्रिष्टुप्छन्दः श्री बगलामुखीदेवता ह्लीं बीजं स्वाहा शक्तिः श्रीबगलामुखीप्रीत्यर्थ जपे विनियोगः ।

ऋष्यादिन्यास

नारदर्षये नमः (शिरसि), त्रिष्टुप्छन्दसे नमः (मुखे), श्रीबगलामुखीदेवतायै नमः (हृदये), ह्लीं बीजाय नमः (गुह्ये), स्वाहा शक्तये नमः (पादयोः), विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) ।

कराङ्ग-न्यास

ह्लीं (अंगु० हृदयाय०), बगलामुखि (तर्जनी० शिरसे०), सर्वदुष्टानां (मध्यमा० शिखायै०), वाचं मुखं स्तम्भय (अनामिका० कवचाय०), जिह्वां कीलय कीलय (कनिष्ठा० नेत्रत्रयाय०), बुद्धि नाशय ह्लीं ॐ स्वाहा (करतल० अस्त्राय०) ।

ध्यान

'मध्ये सुधाब्धि' इत्यादि दो पद्य पृ० २०४ ।

मूलमन्त्र

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धि नाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ।

बीज मंत्र

ह्लीं

साधना विधि

स्रोत के अनुसार इस मन्त्र के लिए नारद ऋषि, त्रिष्टुप् छन्द, श्रीबगलामुखी देवता, ह्लीं बीज और स्वाहा शक्ति के साथ विनियोग बताया गया है। ऋष्यादिन्यास और कराङ्ग-न्यास के बाद ध्यान में 'मध्ये सुधाब्धि' इत्यादि दो पद्य पृ० २०४ कहे गये हैं और हरिद्रा की माला द्वारा जप बताया गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय
  • जिह्वां कीलय
  • बुद्धि नाशय
  • बगलामुखीप्रीत्यर्थ जप
  • हरिद्रा की माला द्वारा जप

लाभ

  • लौकिक और अलौकिक फलों की प्राप्ति सहज होती है
  • विभिन्न काम्यकर्मों की साधना
  • वाचं मुखं स्तम्भय
  • जिह्वां कीलय
  • बुद्धि नाशय

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

दक्षिणाम्नाय में ह्लीं बीज सहित ३४ अक्षरात्मक मन्त्र माना गया है। यथा-- “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ।” इसमें कीलय पद दो बार तथा केवल नाशय पद रखने में यह ३६ अक्षर का मन्त्र बनता है। जबकि ऊर्ध्वाम्नाय में यह मन्त्र ब्रह्मास्त्रस्वरूपिणी बगला का होने से ३६ अक्षरों का हो जाता है। यथा-- “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय, जिह्वां कीलय, बुद्धिं विनाशय, ह्लीं ॐ स्वाहा ।” (मूलतन्त्रे) श्रीबगलामुखी के मन्त्र का विधान इस प्रकार है-- (ख) दो मन्त्रों के विधान १. विनियोग--अस्य श्री बगलामुखी-मन्त्रस्य नारद ऋषिः त्रिष्टुप्छन्दः श्री बगलामुखीदेवता ह्लीं बीजं स्वाहा शक्तिः श्रीबगला- मुखीप्रीत्यर्थ जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास--नारदर्षये नमः (शिरसि), त्रिष्टुप्छन्दसे नमः (मुखे), श्रीबगलामुखीदेवतायै नमः (हृदये), ह्लीं बीजाय नमः (गुह्ये), स्वाहा शक्तये नमः (पादयोः), विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) । कराङ्ग-न्यास--ह्लीं (अंगु० हृदयाय०), बगलामुखि (तर्जनी० शिरसे०) सर्वदुष्टानां (मध्यमा० शिखायै०), वाचं मुखं स्तम्भय (अनामिका० कवचाय०), जिह्वां कीलय कीलय (कनिष्ठा० नेत्र- त्रयाय०), बुद्धि नाशय ह्लीं ॐ स्वाहा (करतल० अस्त्राय०) । ध्यान--'मध्ये सुधाब्धि' इत्यादि दो पद्य पृ० २०४ । हरिद्रा की माला द्वारा जप । मूलमन्त्र--ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धि नाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ।

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