भुवनेश्वरी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
माँ भुवनेश्वरी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र पाठ -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्रीभुवनेश्वरी
भुवनेश्वरी उपासनाशक्ति साधनास्तोत्र पाठरुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में भुवनेश्वरी-अष्टोत्तर शतनामस्तोत्र विनियोग और एकाक्षरी मन्त्र के समान न्यास-ध्यान निर्देश सहित दिया गया है।
मूल मंत्र
विनियोग--अस्य श्रीभुवनेश्वर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रस्य शक्ति- ऋषिः गायत्रीच्छन्दः । श्रीभुवनेश्वरीदेवता मम चतुर्वर्गसाधनार्थं पाठे । पूजने विनियोगः । --इसके न्यास, ध्यानादि एकाक्षरी मन्त्र के समान करें। महामाया महाविद्या महायोगा महोत्कटा । माहेश्वरी कुमारी च ब्रह्माणी ब्रह्मरूपिणी ॥१॥ वागीश्वरी योगरूपा योगिनी कोटिसेविता । जया च विजया चैव कौमारी सर्वमङ्गला ॥२॥ हिङ्गुला च विलासी च ज्वालिनी ज्वालरूपिणी । ईश्वरी क्रूरसंहारी कुलमार्गप्रदायिनी ॥३॥ वैष्णवी सुभगाकारा सुकुल्याकुलपूजिता । वामाङ्गा वामचारा च वामदेवप्रिया तथा ॥४॥ डाकिनी योगिनीरूपा भूतेशी भूतनायिका । पद्मावती पद्मनेत्रा प्रबुद्धा च सरस्वती ॥५॥ भूचरी खेचरी माया मातङ्गी भुवनेश्वरी । कान्ता पतिव्रता साक्षी सुचक्षुः कुण्डवासिनी ॥६॥ उमा कुमारी लोकेशी सुकेशी पद्मरागिणी । इन्द्राणी ब्रह्मचाण्डाली चण्डिका वायुवल्लभा ॥७॥ सर्वधातुमयी मूर्तिर्जलरूपा जलोदरी । आकाशी रणगा चैव नृकपाल-विभूषणा ॥८॥ नर्मदा मोक्षदा चैव कामधर्मार्थदायिनी । गायत्री चाथ सावित्री त्रिसन्ध्या तीर्थगामिनी ॥९॥ अष्टमी नवमी चैव दशम्येकादशी तथा । पौर्णमासी कुहूरूपा तिथिमूर्ति-स्वरूपिणी ॥१०॥ सुरारिनाशकारी च उग्ररूपा च वत्सला । अनला अर्धमात्रा च अरुणा पीतलोचना ॥११॥ लज्जा सरस्वती विद्या भवानी पापनाशिनी । नागपाशधरा मूर्तिरगाधा धृतकुण्डला ॥१२॥ क्षत्ररूपा क्षयकरी तेजस्विनी शुचिस्मिता । अव्यक्ता व्यक्तलोका च शम्भुरूपा मनस्विनी ॥१३॥ मातङ्गी मत्तमातङ्गी महादेवप्रिया सदा । दैत्यहन्त्री चैव वाराही सर्वशास्त्रमयी शुभा ॥१४॥
साधना विधि
स्रोत के अनुसार विनियोग करके इसके न्यास और ध्यान एकाक्षरी मन्त्र के समान करने हैं। माहात्म्य में भक्तिपूर्वक एक काल अथवा त्रिकाल पाठ का निर्देश आया है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- भुवनेश्वरी स्तोत्र पाठ
- चतुर्वर्गसाधनार्थ पाठ
- एक काल पाठ
- त्रिकाल पाठ
- पूजन
लाभ
- पुत्रप्राप्ति
- धन लाभ
- विद्याप्राप्ति
- सद्गति लाभ
- पाप निवारण
- शत्रुनाश
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
यहां हम पाठकों के लिए 'भुवनेश्वरी-अष्टोत्तर शतनामस्तोत्र' का पाठ दे रहे हैं। (ग) अष्टोत्तरशतनामस्तोत्र विनियोग--अस्य श्रीभुवनेश्वर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रस्य शक्ति- ऋषिः गायत्रीच्छन्दः । श्रीभुवनेश्वरीदेवता मम चतुर्वर्गसाधनार्थं पाठे । पूजने विनियोगः । --इसके न्यास, ध्यानादि एकाक्षरी मन्त्र के समान करें। महामाया महाविद्या महायोगा महोत्कटा । माहेश्वरी कुमारी च ब्रह्माणी ब्रह्मरूपिणी ॥१॥ वागीश्वरी योगरूपा योगिनी कोटिसेविता । जया च विजया चैव कौमारी सर्वमङ्गला ॥२॥ हिङ्गुला च विलासी च ज्वालिनी ज्वालरूपिणी । ईश्वरी क्रूरसंहारी कुलमार्गप्रदायिनी ॥३॥ वैष्णवी सुभगाकारा सुकुल्याकुलपूजिता । वामाङ्गा वामचारा च वामदेवप्रिया तथा ॥४॥ डाकिनी योगिनीरूपा भूतेशी भूतनायिका । पद्मावती पद्मनेत्रा प्रबुद्धा च सरस्वती ॥५॥ भूचरी खेचरी माया मातङ्गी भुवनेश्वरी । कान्ता पतिव्रता साक्षी सुचक्षुः कुण्डवासिनी ॥६॥ उमा कुमारी लोकेशी सुकेशी पद्मरागिणी । इन्द्राणी ब्रह्मचाण्डाली चण्डिका वायुवल्लभा ॥७॥ सर्वधातुमयी मूर्तिर्जलरूपा जलोदरी । आकाशी रणगा चैव नृकपाल-विभूषणा ॥८॥ नर्मदा मोक्षदा चैव कामधर्मार्थदायिनी । गायत्री चाथ सावित्री त्रिसन्ध्या तीर्थगामिनी ॥९॥ अष्टमी नवमी चैव दशम्येकादशी तथा । पौर्णमासी कुहूरूपा तिथिमूर्ति-स्वरूपिणी ॥१०॥ सुरारिनाशकारी च उग्ररूपा च वत्सला । अनला अर्धमात्रा च अरुणा पीतलोचना ॥११॥ लज्जा सरस्वती विद्या भवानी पापनाशिनी । नागपाशधरा मूर्तिरगाधा धृतकुण्डला ॥१२॥ क्षत्ररूपा क्षयकरी तेजस्विनी शुचिस्मिता । अव्यक्ता व्यक्तलोका च शम्भुरूपा मनस्विनी ॥१३॥ मातङ्गी मत्तमातङ्गी महादेवप्रिया सदा । दैत्यहन्त्री चैव वाराही सर्वशास्त्रमयी शुभा ॥१४॥ इस स्तोत्र का माहात्म्य भी यहां अति विस्तार से दर्शित है जिसमें भक्तिपूर्वक एक काल अथवा त्रिकाल पाठ करने से पुत्रप्राप्ति, धन लाभ, विद्याप्राप्ति, सद्गति लाभ, पाप निवारण एवं शत्रुनाश आदि होते हैं, ऐसा बतलाया है।
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