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धूमावती माला मंत्र और प्रयोग विधिरुद्रयामल तंत्रहिन्दी

माँ धूमावती माला मंत्र जप और प्रयोग विधि -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताश्री धूमावती

धूमावती साधनादशमहाविद्या साधनामाला मंत्रतांत्रिक मंत्ररुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में '६. भगवती धूमावती की साधना' के अंतर्गत '(घ) श्रीधूमावती माला-मन्त्र' और उसके जप, पुरश्चरण तथा प्रयोग का निर्देश दिया गया है।

मूल मंत्र

ॐ, धूं धूमावति चतुर्दशभुवननिवासिनि सकलग्रहोच्चाटनि सकलशत्रुरक्तमांसभक्षिणि, मम शरीररक्षिणि भूतप्रेत-पिशाचब्रह्मराक्षसादि सकलग्रहसंहारिणि मम शरीर परमन्त्र-परयन्त्र-परतन्त्रनिवारिणि आत्ममन्त्रयन्त्रतन्त्र प्रकाशिनि मम शरीरे परकट्टु-परवाटु-परवेट्टु-परजप-परहोम-परशून्य-परवृष्टि-परकौतुक-परौषधादिच्छेदिनि-चिट्टेरि-काहेरि-कन्नेरि-पाटेरि शुनककाट्टेरि-प्ररिटिकाट्टेरि-दर्भकाट्टेरि-पातालकाट्टेरि-सकलजातिकाट्टेरि-ग्रहच्छेदिनि मम नाभि-कमलस्थान-संचारग्रहसंहारिणि धूम्रलोचनि उग्ररूपिणि सकलविषच्छेदिनि सकलविषसंचयान् नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर-तापज्वर-शीतज्वर-वातज्वर-लूतज्वर-पयत्यज्वर-श्लेष्मज्वर-मोहज्वर-सान्निपातज्वर-पातालकाट्टेरिज्वर-प्रेतज्वर-पिशाचज्वर-कृत्रिमज्वर-नानादोषज्वर-सकलरोगनिवारिणि सकलग्रहच्छेदिनि शिरःशूलाक्षिशूल-कुक्षिशूल कर्णशूल-नाभिशूल-कटिशूल-पार्श्वशूल-गण्डशूल-गुल्मशूलांगशूल-सकलशूलान् निधूमय सकलग्रहान् निवारय निवारय रां रां रां रां रां, क्षां क्षां क्षां क्षां क्षां, खों खों खों खों खों, धूं धूं धूं धूं धूं, फें फें फें फें फें, धूं धूं धूं धूं धूं धूमावति मां रक्ष रक्ष शीघ्रं शीघ्रं मां रोगच्छेदिनि शीघ्रमेवारोग्यं कुरु कुरु हुं फट् धूं धूं धूमावति स्वाहा ।

बीज मंत्र

धूंरांक्षांखोंफें

साधना विधि

स्रोत के अनुसार इस मन्त्र का १०८ या १००८ की संख्या में जप करने से सब प्रकार के संकटों का नाश एवं सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। सूर्य-ग्रहण, चन्द्रग्रहण, अक्षयतृतीया की रात्रि और होली की रात्रि में विधिवत् पुरश्चरण करके इसे सिद्ध कर लेने और आवश्यकता पड़ने पर जल-भस्म आदि का अभिमन्त्रण तथा नीम की डाली से झाड़-फूँक में उपयोग करने का निर्देश दिया गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • १०८ या १००८ जप
  • सूर्य-ग्रहण में पुरश्चरण
  • चन्द्रग्रहण में पुरश्चरण
  • अक्षयतृतीया और होली की रात्रि में पुरश्चरण
  • जल-भस्म आदि का अभिमन्त्रण
  • नीम की डाली से झाड़-फूँक

लाभ

  • सब प्रकार के संकटों का नाश
  • सुख-समृद्धि प्राप्त होती है
  • रोग एवं भूत-प्रेतादि के दोष दूर होते हैं

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

धूमावती देवी का 'मालामन्त्र' यहां पाठकों की सुविधा के लिए हम दे रहे हैं। इस मन्त्र का १०८ या १००८ की संख्या में जप करने से सब प्रकार के संकटों का नाश एवं सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। मूल मालामन्त्र इस प्रकार है-- (घ) श्रीधूमावती माला-मन्त्र--“ॐ, धूं धूमावति चतुर्दश- भुवननिवासिनि सकलग्रहोच्चाटनि सकलशत्रुरक्तमांसभक्षिणि, मम शरीररक्षिणि भूतप्रेत-पिशाचब्रह्मराक्षसादि सकलग्रहसंहारिणि मम शरीर परमन्त्र-परयन्त्र-परतन्त्रनिवारिणि आत्ममन्त्रयन्त्रतन्त्र प्रका- शिनि मम शरीरे परकट्टु-परवाटु-परवेट्टु-परजप-परहोम-परशून्य- परवृष्टि-परकौतुक-परौषधादिच्छेदिनि-चिट्टेरि-काहेरि-कन्नेरि-पाटेरि शुनककाट्टेरि-प्ररिटिकाट्टेरि-दर्भकाट्टेरि-पातालकाट्टेरि-सकलजाति- काट्टेरि-ग्रहच्छेदिनि मम नाभि-कमलस्थान-संचारग्रहसंहारिणि धूम्र- लोचनि उग्ररूपिणि सकलविषच्छेदिनि सकलविषसंचयान् नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर-तापज्वर-शीतज्वर-वातज्वर-लूतज्वर- पयत्यज्वर-श्लेष्मज्वर-मोहज्वर-सान्निपातज्वर-पातालकाट्टेरिज्वर- प्रेतज्वर-पिशाचज्वर-कृत्रिमज्वर-नानादोषज्वर-सकलरोगनिवारिणि सकलग्रहच्छेदिनि शिरःशूलाक्षिशूल-कुक्षिशूल कर्णशूल-नाभिशूल- कटिशूल-पार्श्वशूल-गण्डशूल-गुल्मशूलांगशूल-सकलशूलान् निधूमय सकलग्रहान् निवारय निवारय रां रां रां रां रां, क्षां क्षां क्षां क्षां क्षां, खों खों खों खों खों, धूं धूं धूं धूं धूं, फें फें फें फें फें, धूं धूं धूं धूं धूं धूमावति मां रक्ष रक्ष शीघ्रं शीघ्रं मां रोगच्छेदिनि शीघ्रमेवारोग्यं कुरु कुरु हुं फट् धूं धूं धूमावति स्वाहा ।” इस मन्त्र को सूर्य-ग्रहण, चन्द्रग्रहण, अक्षयतृतीया की रात्रि और होली की रात्रि में विधिवत् पुरश्चरण करके सिद्ध कर लें और बाद में आवश्यकता पड़ने पर जल-भस्म आदि का अभिमन्त्रण तथा नीम की डाली से झाड़-फूँक करने में उपयोग करें इससे रोग एवं भूत-प्रेतादि के दोष दूर होते हैं।

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माँ धूमावती माला मंत्र जप और प्रयोग विधि -रुद्रयामल तंत्र — रुद्रयामल तंत्र | Pauranik